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Monday, 26 December 2016

चैतन्य महाप्रभु की 500 वीं जंयती पर स्मारक और प्रचलन सिक्के जारी

वृंदावन में श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन की 500 वीं जंयती पर स्मारक और प्रचलन सिक्के जारी


संस्कृति सचिव श्री नरेन्द्र कुमार सिन्हा ने 25-नवम्बर,2016 को “वृंदावन" में श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन की 500 वीं जंयती” पर वर्ष भर चलने वाले समारोहों के मद्देनजर 500 रुपये के स्मारक गैर-प्रचलन सिक्के और 10 रुपये के प्रचलन सिक्के जारी किए।
भारत के प्रसिद्ध संत और समाज सुधारक श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने भक्ति योग के वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की थी। उन्होंने जो भक्ति आंदोलन शुरू किया था, उसका उद्देश्य मध्य युगीन भारत में व्याप्त जातिवाद की बुराइयों और सामंती प्रणाली का उन्मूलन करना था। श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान श्री कृष्ण की उपासना का प्रचार किया और “हरे कृष्ण मंत्र” के जाप को लोकप्रिय बनाया। यह जाप बिना किसी भेदभाव के कोई भी कर सकता है।
वर्ष 1515 में श्री चैतन्य महाप्रभु वृंदावन में पधारे थे और उनका उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण से जुड़े सभी पवित्र स्थानों को खोजना था। माना जाता है कि अपनी आध्यात्मिक शक्ति से श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान श्री कृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को खोज निकाला और धार्मिक परंपरा की प्राचीन पवित्रता को दोबारा स्थापित किया।
भारत सरकार वृंदावन में श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन की 500 वीं जंयती मना रही है। जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों तथा वृंदावन अनुसंधान संस्थान तथा इस्कॉन के सहयोग से श्री चैतन्य महाप्रभु के जीवन एवं शिक्षाओं पर प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह 25 नवम्बर, 2015 को वृंदावन में आयोजित किया गया। यह आयोजन वृंदावन अनुसंधान संस्थान ने किया था। एक दूसरा कार्यक्रम वृंदावन अनुसंधान संस्थान ने 5 – 7 नवम्बर, 2016 को श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्म स्थान मायापुर, नादिया में किया था। “श्री चैतन्य प्रेम रथ” नामक चलित प्रदर्शनी 8 फरवरी, 2016 को वृंदावन से रवाना हुई थी, जो उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा के विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए 9 मार्च, 2016 को दिल्ली पहुंची थी।