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Sunday, 25 December 2016

बांग्ला साहित्य के जानेमाने कवि शंख घोष को वर्ष 2016 का ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा


जाने-माने बांग्ला कवि और आलोचक शंख घोष को मिलेगा वर्ष 2016 का ज्ञानपीठ पुरस्कार



 वर्ष 2016 का 52वां ज्ञानपीठ पुरस्कार कवि शंख घोष को प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के रूप में उनको वाग्देवी की प्रतिमा, 11 लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। कवि शंख घोष 19 साल बाद देश का सर्वोच्च साहित्य सम्मान पाने वाले बांग्ला लेखक हैं। कवि शंख घोष से पहले 1996 में बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।

विद्वान, समालोचक और लेखक डा. नामवर सिंह की अध्यक्षता में ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की बैठक में निर्णय किया गया कि वर्ष 2016 का 52वां ज्ञानपीठ पुरस्कार कवि शंख घोष को प्रदान किया जाएगा। शंख घोष की प्रमुख रचनाओं में आदिम लता-गुलमोमॉय, मूखरे बारो, सामाजिक नोय, बाबोरेर प्रार्थना, दिनगुली रातगुली और निहिता पातालछाया शामिल हैं। उनका जन्म 1932 में हुआ था और उन्हें कवि, आलोचक और विद्वान के तौर पर जाना जाता है।

शंख घोष को साहित्य अकादमी पुरस्कार, सरस्वती सम्मान, रवीन्द्र पुरस्कार जैसे महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाजा गया है। इससे पहले बांग्ला लेखकों ताराशंकर, विष्णु दे, सुभाष मुखोपाध्याय, आशापूर्णा देवी और महाश्वेता देवी को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है।

पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था और वर्ष 2015 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से गुजराती लेखक रघुवीर चौधरी को प्राप्त हुआ था। वर्ष 2016 तक 57 लेखकों को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।